Sunday, July 19, 2026

विश्वगुरु को आखिर हुआ क्या है .... ?

 अवैज्ञानिकता का अलौकिक ज्ञान 


हे परम ज्ञानी, अजीव (नॉन बायोलॉजिकल), गंगा के स्वघोषित पुत्र, चौकीदारों के चौकीदार, आपकी माया अपरमपार है। आपके विविध रूप हैं। आपके शरण में आने वालों के सभी पाप कट जाते हैं और आपकी कृपा से सभी पापों को करने की छूट मिल जाती है। हे, असंख्य रूपों के स्वामी मेरी जिज्ञासा को शांत करें।

आर्यवर्त के कुछ अज्ञानी लोग यह कह रहे हैं कि आपके राज में विज्ञान की कोई कद्र नहीं है। वैज्ञानिकों को नौकरी छोड़ना पड़ रहा है। वे ISRO से नौकरी छोड़ने वाले लगभग 100 वैज्ञानिकों का हवाला दे रहे हैं, और कहते हैं कि बड़े–बड़े शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता आर्यावर्त छोड़कर दूसरे लोक (देश) जा रहे हैं। अज्ञानी लोग इसमें आपकी कमी ढूंढ रहे हैं। वो आपकी महानता को गाली दे रहे हैं। हे, दुश्मनों के नाथ कृप्या मेरी इस शंका का समाधान करें।

अरे तुच्छ मानव, इस देश में स्कूलों और कॉलेजों में जीवन के महत्वपूर्ण कई वर्ष बिताकर आर्यावर्त के कुछ लोग चंद प्रमाणपत्रों के आधार पर वैज्ञानिक बन बैठे हैं। उन्हें यह मालूम नहीं है कि और नाना प्रकार के शोध में धन खर्च कर रहे हैं। जब देश में धन का उपयोग धार्मिक कार्यों के स्थान पर वैज्ञानिक कार्यों पर होती है तो इससे धर्म कमजोर होता है। व्यक्ति भक्ति छोड़ शिक्षा के दलदल में फँसता है और अपनी जन्म-जन्मांतर से मुक्ति के स्थान पर मोह-माया को चुनता है। व्यक्ति मुझसे पहले शिक्षा की मांग करते हैं फिर नौकरी की। उसके बाद वेतन और भत्ते की। फिर दूसरी सांसरिक सुखों की। सारा विज्ञान हमारे शास्त्रों में लिखा है।

अज्ञानी मानवजाति कर्मफल के चक्र में उलझकर अपनी मुक्ति मार्ग से विरक्त हो जाता है। ये विज्ञान ही है जो मनुष्यों को ज्यादा सोचने और सवाल पुछने के लिए प्रेरित करता है । इसलिए हे तुच्छ मानव, मैं विज्ञान और वैज्ञानिक सोच का नाश करने के लिए ही इस मर्त्यलोक में विचरण कर रहा हूँ।

हे मनुष्य, तुम जिन वैज्ञानिकों की बातें कर रहे हो वे सभी हमारे शास्त्रीय ज्ञान को चुनौती दे रहे थे। ये तुच्छ लोग मंगल और चंद्रमा पर जाने की तैयारी कर रहे थे। ये सभी नाना प्रकार के कृत्रिम उपग्रहों के माध्यम पृथ्वी और अंतरिक्ष के रहस्यों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे। इसमें देश के संसाधनों का काफी नुकसान हो रहा था।

हमारे देश में आँखें बंद कर कुछ कुछ मंत्र पढ़ते ही समस्त सृष्टि या तीनों लोगों का भ्रमण किया जा सकता है। हमारे नारद मुनि बिना किसी वायुयान के तीनों लोकों की यात्रा करते हैं और सबकी भूत-भविष्य और वर्तमान की खबर रखते हैं। हमने इतने बड़े-बड़े मंदिर बनाए हैं ताकि सभी नागरिक वहाँ जाकर परम ज्ञान की प्राप्ति करे और दान पेटियों में मर्त्यलोक में अर्जित धन और लोभ अर्पित करे। हमारा नाम जपने मात्र से मनुष्य सभी दोषों से मुक्त होकर सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है, तो फिर विज्ञान और उसके प्रयोगों की आवश्यकता ही क्या है?

यथाग्नि रुद्धतशिख: कक्षां दहति सानिल: ।

तथा चित्तस्थितो विष्णुर्योगिनां सर्वकिल्विषम । ।

                                                                       * विष्णु पुराण, ६/७/७४

अर्थात, “नाम स्मरण करते ही भगवान ज्यों ही साधक के हृदय में विराजते हैं, त्यों ही उसके समस्त दोषों को नष्ट कर देते हैं, जिस प्रकार ऊंची-ऊंची लपटों वाला अग्नि वायु के साथ मिलकर सुखी घास के ढेर को जला डालता है।“                                                              

हमारे शास्त्रों के अनुसार मंगल, चंद्रमा जैसे ग्रह मनुष्यों के भविष्य का फैसला करते हैं। हमारे देश के संकड़ों ब्राह्मण इन ग्रहों को मंत्रों, अंगूठियों, हवन आदि से नियंत्रित करते हैं। ISRO में हो रहे अनुसन्धानों से न केवल हमारे देश का धन बर्बाद हो रहा था बल्कि हमारे महान ज्ञान पर भी सवाल खड़े हो रहे थे। इन सभी वैज्ञानिकों को इसका एहसास होते ही उन्होंने इस्तीफा देकर इस देश की महान धार्मिक विरासत के प्रति अपनी आदर व्यक्त की है। कुछ पापी मनुष्य जो इसे अनर्थ बता रहे हैं वे यह नहीं समझ रहे हैं विश्वगुरु होने के लिए हमारे वैज्ञानिकों का त्यागपत्र देना कितना आवश्यक था। 

भविष्य में आर्यावर्त की महान परंपरा को देखते हुये ISRO में उन वैज्ञानिकों की जगह – धीरेंद्र शास्त्री, जग्गी वसुदेव, अनिरुद्धचार्य आदि की सेवाएँ ली जाएंगी जो विश्व के कल्याण के लिए पर्चियाँ निकालेंगे या हवन करेंगे। तुम लोग अपनी भक्ति में डूबे रहो। अवैज्ञानिकता की अलौकिक ज्ञान से पूरे आर्यावर्त को सम्मोहित करो। अपनी पूरी शक्ति से कली काल में वैज्ञानिक सोचों का दमन करो, इसी में तुम्हारी मुक्ति है। 

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